अंतरसंबद्ध विश्व हेतु वन हेल्थ दृष्टिकोण

पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य

संदर्भ

  • ज़ूनोटिक रोगों और एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) की बढ़ती घटनाओं ने मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए एक समन्वित वन हेल्थ दृष्टिकोण की आवश्यकता को उजागर किया है।

वन हेल्थ दृष्टिकोण क्या है?

  • वन हेल्थ एकीकृत और एकीकृत करने वाला दृष्टिकोण है जिसका उद्देश्य लोगों, पशुओं एवं पारिस्थितिक तंत्रों के स्वास्थ्य को स्थायी रूप से संतुलित और अनुकूलित करना है।
  •  यह मान्यता देता है कि मनुष्यों, घरेलू और जंगली पशुओं, पौधों तथा व्यापक पर्यावरण (जिसमें पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं) का स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़ा तथा परस्पर निर्भर है।

वन हेल्थ अवधारणा का विकास

  • यह अवधारणा 2003–04 में गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (SARS) के प्रकोप के दौरान प्रमुखता से उभरी।
    • एवियन इन्फ्लुएंजा H5N1 के प्रसार के दौरान इसे और सुदृढ़ किया गया।
  • मैनहट्टन सिद्धांतों ने औपचारिक रूप से मानव और पशु स्वास्थ्य के बीच संबंधों तथा उनके वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं खाद्य सुरक्षा पर प्रभावों को मान्यता दी।
  • वैज्ञानिक प्रमाणों ने समय के साथ दिखाया कि:
    • लगभग 75% उभरते संक्रामक रोग ज़ूनोटिक हैं।
    • भूमि उपयोग परिवर्तन, शहरीकरण और वैश्विक व्यापार जैसे मानवजनित कारक रोगों के उद्भव को बढ़ावा देते हैं।

वन हेल्थ दृष्टिकोण का महत्व

  • बढ़ते ज़ूनोटिक रोग: उभरते रोगजनकों का बड़ा हिस्सा पशुओं से उत्पन्न होता है और मनुष्यों में फैलता है। वन्यजीव आवासों में मानव अतिक्रमण ने इन जोखिमों को और बढ़ा दिया है।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: जलवायु परिवर्तन पारिस्थितिक तंत्र, वाहक वितरण और रोग संचरण पैटर्न को बदल रहा है। चरम मौसम घटनाएँ पहले से ही संवेदनशील स्वास्थ्य प्रणालियों की कमजोरियों को बढ़ा रही हैं।
  • एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR): मनुष्यों, पशुधन और कृषि में एंटीबायोटिक का अंधाधुंध उपयोग AMR को तीव्र कर रहा है। इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए एक बहु-क्षेत्रीय रणनीति आवश्यक है।
  • स्वास्थ्य जोखिमों का वैश्वीकरण: लोगों और वस्तुओं की बढ़ती गतिशीलता ने रोगों के तीव्र सीमा-पार प्रसार को सक्षम बनाया है। स्वास्थ्य सुरक्षा अब वैश्विक सामूहिक कार्रवाई का विषय बन गई है।

वन हेल्थ को सुदृढ़ करने वाली वैश्विक पहलें

  • चतुष्क सहयोग (Quadripartite Collaboration): इसमें शामिल हैं –
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
    • खाद्य और कृषि संगठन (FAO)
    • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)
    • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH)
  • वन हेल्थ संयुक्त कार्य योजना (2022): इसका उद्देश्य देशों में निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ करना है। यह ज़ूनोटिक रोगों एवं AMR से समन्वित तरीके से निपटने पर केंद्रित है।
  • WHO महामारी समझौता: इसका उद्देश्य देशों के बीच टीकों और उपचारों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है। यह वैश्विक स्तर पर रोगजनक डेटा-साझाकरण तंत्र स्थापित करने का भी प्रयास करता है।

राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन

  • प्रारंभ: प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) ने 2022 में एक राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान दी।
  • उद्देश्य: ज़ूनोटिक रोगों, AMR और उभरते स्वास्थ्य खतरों की निगरानी, रोकथाम और नियंत्रण हेतु एकीकृत ढाँचा विकसित करना।
  • दृष्टिकोण: स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि, पर्यावरण आदि मंत्रालयों, अनुसंधान संस्थानों और राज्य सरकारों के बीच बहु-क्षेत्रीय सहयोग।
  • मुख्य क्षेत्र:
    • ज़ूनोटिक रोग (जैसे निपाह, एवियन इन्फ्लुएंजा, COVID-19 की उत्पत्ति)।
    • खाद्य सुरक्षा और AMR।
    • जलवायु परिवर्तन और रोग प्रसार पर उसका प्रभाव।
    • प्रयोगशालाओं और डेटा एकीकरण प्लेटफ़ॉर्म के लिए क्षमता निर्माण।

वन हेल्थ को लागू करने में चुनौतियाँ

  • अंतर-क्षेत्रीय समन्वय: मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच विखंडित संस्थागत ढाँचे।
  • प्रशिक्षित कार्यबल की कमी: जिला स्तर पर महामारी विशेषज्ञों, ज़ूनोटिक रोग विशेषज्ञों और डेटा वैज्ञानिकों की कमी।
  • संरचनात्मक असमानताएँ: राज्यों में निगरानी क्षमताओं और डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण में भिन्नता।
  • डेटा गोपनीयता और साझाकरण: क्षेत्रों के बीच सुरक्षित और प्रभावी वास्तविक समय डेटा प्रवाह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है।

आगे की राह

  • एकीकृत और वास्तविक समय निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ किया जाना चाहिए ताकि उभरते स्वास्थ्य खतरों का शीघ्र पता लगाया जा सके तथा समय पर प्रतिक्रिया दी जा सके।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ किया जाना चाहिए ताकि देशों के बीच टीकों, निदान और उपचारों तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके।
  • क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि निवारक और लचीली स्वास्थ्य प्रणालियाँ सुदृढ़ हो सकें।

स्रोत: TH

 

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